परीक्षा को अंकों की दौड़ नहीं, व्यक्तित्व विकास का माध्यम समझें: सुरेश चंद्र आर्य
परीक्षा को अंकों की दौड़ नहीं, व्यक्तित्व विकास का माध्यम समझें: सुरेश चंद्र आर्य
परीक्षा पे चर्चा 2026’ से प्रेरित संदेश—अभिभावक अपेक्षाओं का बोझ न डालें, सहयोगी वातावरण बनाएं
‘परीक्षा पे चर्चा 2026’ के विचारों से प्रेरणा लेते हुए एसजीजीआर इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य सुरेश चंद्र आर्य ने विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों को परीक्षा से जुड़े तनाव को दूर करने का सार्थक संदेश दिया। विद्यालय परिसर में आयोजित एक विशेष मार्गदर्शन सत्र में उन्होंने कहा कि परीक्षा को केवल अंकों की प्रतिस्पर्धा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, अनुशासन, धैर्य और सकारात्मक सोच विकसित करने की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है।
प्रधानाचार्य सुरेश चंद्र आर्य ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि वे अपनी क्षमता पर विश्वास रखें और परीक्षा के अंतिम दिनों में अनावश्यक दबाव से दूर रहें। उन्होंने स्पष्ट किया कि घबराहट और तनाव से प्रदर्शन प्रभावित होता है, जबकि शांत और संतुलित मन से की गई तैयारी सफलता का मार्ग प्रशस्त करती है। उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि परीक्षा से एक दिन पूर्व नए विषयों को पढ़ने के बजाय पहले से तैयार किए गए पाठ्यक्रम का शांत मन से दोहराव करें।
उन्होंने यह भी कहा कि समय से परीक्षा केंद्र पहुँचना, प्रश्नपत्र को ध्यानपूर्वक पढ़ना और संयमित एवं एकाग्र मन से उत्तर लिखना अच्छे परिणाम प्राप्त करने में सहायक सिद्ध होता है। “प्रश्नपत्र मिलने के बाद जल्दबाजी न करें, पहले पूरे प्रश्नपत्र को समझें, फिर अपनी योजना के अनुसार उत्तर लिखें,उन्होंने विद्यार्थियों को सुझाव देते हुए कहा।
अभिभावकों को संबोधित करते हुए सुरेश चंद्र आर्य ने कहा कि बच्चों पर अपेक्षाओं का अतिरिक्त बोझ डालना उनके मानसिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। उन्होंने आग्रह किया कि अभिभावक बच्चों का मनोबल बढ़ाएँ, उनकी भावनाओं को समझें और उन्हें भावनात्मक सहयोग प्रदान करें। बच्चों को यह महसूस होना चाहिए कि परिवार उनके साथ है, परिणाम चाहे जो भी हो, उन्होंने कहा।
प्रधानाचार्य ने यह भी कहा कि घर में पढ़ाई के लिए शांत, सकारात्मक और सहयोगात्मक वातावरण उपलब्ध कराना अत्यंत आवश्यक है। साथ ही मोबाइल फोन और टेलीविजन के सीमित उपयोग पर ध्यान देकर बच्चों को एकाग्रता बनाए रखने में मदद की जा सकती है। उन्होंने शिक्षकों से भी अपील की कि वे विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हुए उन्हें तनावमुक्त वातावरण प्रदान करें और उनके आत्मविश्वास को मजबूत करें।
अपने संबोधन के अंत में सुरेश चंद्र आर्य ने कहा कि जब विद्यालय, परिवार और छात्र आपसी सहयोग, संवाद और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ते हैं, तो परीक्षा का अनुभव तनावमुक्त बन जाता है। ऐसे माहौल में विद्यार्थी न केवल बेहतर प्रदर्शन करते हैं, बल्कि एक आत्मविश्वासी और उज्ज्वल भविष्य की ओर भी दृढ़ कदम बढ़ाते हैं।
Reviewed by Hindustan News 18
on
February 18, 2026
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