गुर्जरों ने धूमधाम से मनाया मिहिरोत्सव।
गुर्जरों ने धूमधाम से मनाया मिहिरोत्सव।
मिहिरोत्सव कार्यक्रम में प्रदेश भर से जुटे गुर्जर।
राजस्थान प्रदेश भर से मिहिरोत्सव कार्यक्रम में त्रिवेणी संगम स्थित गुर्जर धर्मशाला में गुर्जर समाज ने गुर्जर सम्राट मिहिरभोज प्रतिहार जयन्ती को मिहिरोत्सव के रूप में धूमधाम से मनाया। इस अवसर पर राजकीय सेवाओं में नवचयनित हुए गुर्जर युवाओं का सम्मान किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि गुर्जर इतिहास शोध संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष इसम सिंह चौहान ने गुर्जर सम्राट कनिष्क, गुर्जर सम्राट मिहिरकुल, गुर्जर सम्राट मिहिरभोज, भगवान श्री देवनारायण, सरदार पटेल, विजय सिंह पथिक, पन्नाधाय आदि गुर्जर महापुरुषों के इतिहास से समाजजनों को अवगत करवाया। गुर्जर इतिहासकार इसम सिंह चौहान ने कहा कि हूण, कुषाण, प्रतिहार, चौहान, चालुक्य, गहलोत, परमार, भोंसले आदि वंश मूलतः गुर्जर जाति के ही है। गुर्जर सूर्यवंशी कौम है, मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम गुर्जर वंश के थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता अखिल भारतीय गुर्जर महासभा भीलवाड़ा के जिलाध्यक्ष भेरूलाल भड़ाना ने संबोधित करते हुए कहा कि गुर्जर सम्राट मिहिरभोज ने अपने समय में सुशासन कायम किया था, आज गुर्जर समाज के युवा गुर्जर सम्राट कनिष्क, मिहिरभोज, विजय सिंह पथिक जैसे महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लेकर आगे बढ़े। गुर्जर इतिहासकार डॉ मोहनलाल वर्मा ने कहा कि गुर्जर समाज अपने स्वर्णिम इतिहास से प्रेरणा लेकर अपने वर्तमान के इतिहास को उज्ज्वल बनाए एवं साथ ही कहा कि गुर्जर सम्राट मिहिरभोज जयन्ती को हर वर्ष मिहिरोत्सव के रूप में मनाया जाता है और गुर्जर सम्राट कनिष्क महान के राज्यारोहण दिन 22 मार्च को हर वर्ष गुर्जर समाज द्वारा पूरे विश्व में अंतर्राष्ट्रीय गुर्जर दिवस के रूप में मनाया जाता है। जयपुर से आए विजय सिंह गुर्जर ने सामाजिक एकता पर बल दिया। टोंक से आए बीएल गुर्जर ने कहा कि समाज में अनावश्यक कुरूतियों को पूर्णरूपेण बन्द कर शिक्षा को बढ़ावा देव। युवा गुर्जर महासभा के पूर्व जिलाध्यक्ष नन्दलाल गुर्जर ने कहा कि समाज के युवा शिक्षा को अपनाकर आगे बढ़े साथ ही अपने दूध के मूलभूत व्यवसाय को सहकारिता के माध्यम से कर स्वयं का उद्योग स्थापित कर समाज को प्रगतिशील बनाए। बगड़ावत गाथा के लेखक शिवराज गुर्जर, अखिल भारतीय गुर्जर महासभा के ब्लॉक उपाध्यक्ष एडवोकेट उदयलाल गुर्जर, युवा महासभा जहाजपुर के अध्यक्ष दिनेश गुर्जर, सवाईमाधोपुर के मनीराम गुर्जर, पथिक सेना के भीलवाड़ा शहर अध्यक्ष लादूलाल गुर्जर, राजसमंद के भँवर गुर्जर, दौसा के करतार सिंह गुर्जर, करौली के भमन सिंह गुर्जर, भरतपुर के रामदयाल गुर्जर, रामस्वरूप गुर्जर, लक्ष्मण गुर्जर, राधेश्याम गुर्जर, सरपंच लादूलाल गुर्जर, सीआर शिवकुमार गुर्जर, पूर्व सरपंच शंकर गुर्जर, पूर्व सरपंच नानालाल गुर्जर, पूर्व सरपंच प्रेमचंद गुर्जर, घीसालाल गुर्जर, देवकरण गुर्जर, नन्दलाल गुर्जर, भामाशाह मगनालाल गुर्जर, राजूलाल गुर्जर, प्रकाश गुर्जर, महेन्द्र गुर्जर, बरदीचन्द गुर्जर, शंकरलाल गुर्जर, चांदमल गुर्जर, गुर्जर धर्मशाला के अध्यक्ष कन्हैयालाल गुर्जर, देवकरण गुर्जर, रामेश्वर गुर्जर, अर्जुन गुर्जर, देवालाल गुर्जर, यूथ कांग्रेस अध्यक्ष गोपाल गुर्जर, राष्ट्रीय वीर गुर्जर महासभा के अध्यक्ष सोराम गुर्जर, एनएसयूआई के ब्लॉक अध्यक्ष सीताराम गुर्जर, कैलाश गुर्जर, किशनलाल गुर्जर, रामकिशन गुर्जर, महावीर गुर्जर, मोतीलाल गुर्जर, नन्दलाल गुर्जर, पन्नालाल गुर्जर, गणेश गुर्जर, बाबू गुर्जर, रामपाल गुर्जर, सोजीराम गुर्जर सहित आदि वक्ताओ ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि समाज एकजुट रहकर संघर्ष करें एवं बिजौलिया के राजकीय महाविद्यालय का नामकरण हर हाल में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी विजय सिंह पथिक के नाम करे। कार्यक्रम का संचालन एडवोकेट शंकरलाल गुर्जर ने किया एवं सामाजिक कार्यकर्ता नन्दलाल गुर्जर ने सभी का आभार प्रकट किया।
मिहिरोत्सव कार्यक्रम में प्रदेश भर से जुटे गुर्जर।
राजस्थान प्रदेश भर से मिहिरोत्सव कार्यक्रम में त्रिवेणी संगम स्थित गुर्जर धर्मशाला में गुर्जर समाज ने गुर्जर सम्राट मिहिरभोज प्रतिहार जयन्ती को मिहिरोत्सव के रूप में धूमधाम से मनाया। इस अवसर पर राजकीय सेवाओं में नवचयनित हुए गुर्जर युवाओं का सम्मान किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि गुर्जर इतिहास शोध संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष इसम सिंह चौहान ने गुर्जर सम्राट कनिष्क, गुर्जर सम्राट मिहिरकुल, गुर्जर सम्राट मिहिरभोज, भगवान श्री देवनारायण, सरदार पटेल, विजय सिंह पथिक, पन्नाधाय आदि गुर्जर महापुरुषों के इतिहास से समाजजनों को अवगत करवाया। गुर्जर इतिहासकार इसम सिंह चौहान ने कहा कि हूण, कुषाण, प्रतिहार, चौहान, चालुक्य, गहलोत, परमार, भोंसले आदि वंश मूलतः गुर्जर जाति के ही है। गुर्जर सूर्यवंशी कौम है, मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम गुर्जर वंश के थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता अखिल भारतीय गुर्जर महासभा भीलवाड़ा के जिलाध्यक्ष भेरूलाल भड़ाना ने संबोधित करते हुए कहा कि गुर्जर सम्राट मिहिरभोज ने अपने समय में सुशासन कायम किया था, आज गुर्जर समाज के युवा गुर्जर सम्राट कनिष्क, मिहिरभोज, विजय सिंह पथिक जैसे महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लेकर आगे बढ़े। गुर्जर इतिहासकार डॉ मोहनलाल वर्मा ने कहा कि गुर्जर समाज अपने स्वर्णिम इतिहास से प्रेरणा लेकर अपने वर्तमान के इतिहास को उज्ज्वल बनाए एवं साथ ही कहा कि गुर्जर सम्राट मिहिरभोज जयन्ती को हर वर्ष मिहिरोत्सव के रूप में मनाया जाता है और गुर्जर सम्राट कनिष्क महान के राज्यारोहण दिन 22 मार्च को हर वर्ष गुर्जर समाज द्वारा पूरे विश्व में अंतर्राष्ट्रीय गुर्जर दिवस के रूप में मनाया जाता है। जयपुर से आए विजय सिंह गुर्जर ने सामाजिक एकता पर बल दिया। टोंक से आए बीएल गुर्जर ने कहा कि समाज में अनावश्यक कुरूतियों को पूर्णरूपेण बन्द कर शिक्षा को बढ़ावा देव। युवा गुर्जर महासभा के पूर्व जिलाध्यक्ष नन्दलाल गुर्जर ने कहा कि समाज के युवा शिक्षा को अपनाकर आगे बढ़े साथ ही अपने दूध के मूलभूत व्यवसाय को सहकारिता के माध्यम से कर स्वयं का उद्योग स्थापित कर समाज को प्रगतिशील बनाए। बगड़ावत गाथा के लेखक शिवराज गुर्जर, अखिल भारतीय गुर्जर महासभा के ब्लॉक उपाध्यक्ष एडवोकेट उदयलाल गुर्जर, युवा महासभा जहाजपुर के अध्यक्ष दिनेश गुर्जर, सवाईमाधोपुर के मनीराम गुर्जर, पथिक सेना के भीलवाड़ा शहर अध्यक्ष लादूलाल गुर्जर, राजसमंद के भँवर गुर्जर, दौसा के करतार सिंह गुर्जर, करौली के भमन सिंह गुर्जर, भरतपुर के रामदयाल गुर्जर, रामस्वरूप गुर्जर, लक्ष्मण गुर्जर, राधेश्याम गुर्जर, सरपंच लादूलाल गुर्जर, सीआर शिवकुमार गुर्जर, पूर्व सरपंच शंकर गुर्जर, पूर्व सरपंच नानालाल गुर्जर, पूर्व सरपंच प्रेमचंद गुर्जर, घीसालाल गुर्जर, देवकरण गुर्जर, नन्दलाल गुर्जर, भामाशाह मगनालाल गुर्जर, राजूलाल गुर्जर, प्रकाश गुर्जर, महेन्द्र गुर्जर, बरदीचन्द गुर्जर, शंकरलाल गुर्जर, चांदमल गुर्जर, गुर्जर धर्मशाला के अध्यक्ष कन्हैयालाल गुर्जर, देवकरण गुर्जर, रामेश्वर गुर्जर, अर्जुन गुर्जर, देवालाल गुर्जर, यूथ कांग्रेस अध्यक्ष गोपाल गुर्जर, राष्ट्रीय वीर गुर्जर महासभा के अध्यक्ष सोराम गुर्जर, एनएसयूआई के ब्लॉक अध्यक्ष सीताराम गुर्जर, कैलाश गुर्जर, किशनलाल गुर्जर, रामकिशन गुर्जर, महावीर गुर्जर, मोतीलाल गुर्जर, नन्दलाल गुर्जर, पन्नालाल गुर्जर, गणेश गुर्जर, बाबू गुर्जर, रामपाल गुर्जर, सोजीराम गुर्जर सहित आदि वक्ताओ ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि समाज एकजुट रहकर संघर्ष करें एवं बिजौलिया के राजकीय महाविद्यालय का नामकरण हर हाल में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी विजय सिंह पथिक के नाम करे। कार्यक्रम का संचालन एडवोकेट शंकरलाल गुर्जर ने किया एवं सामाजिक कार्यकर्ता नन्दलाल गुर्जर ने सभी का आभार प्रकट किया।
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Reviewed by Hindustan News 18
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September 01, 2019
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