पियक्कड़ पतियों की अब यहां खैर नही , पत्नियों ने खोला मोर्चा
पियक्कड़ पतियों की अब यहां खैर नही , पत्नियों ने खोला मोर्चा
हिन्दुस्तान न्यूज 18
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के निकट रहीमाबाद के बंजारन खेड़ा गांव की महिलाओं ने शराब पीकर घर आने वाले पतियों को सबक सिखाने की पूरी तैयारी कर ली है। महिलाओं का कहना है कि ना तो गांव के आसपास शराब बनने देंगे और ना ही शराब पीकर गांव में घुसने देंगे। इसके बाद एक संगठन की महिलाएं गांव पहुंची और उन्होंने महिलाओं के हौसले को सराहा। गांव की महिलाओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि इलाके में पूरी तरह से शराब बंद होनी चाहिए। आसपास के अन्य गांव की महिलाएं भी इस अभियान में साथ आ रही हैं।
महिलाओं का कहना है कि शराब से कई परिवार तबाह हो चुके हैं। अब इस तबाही को रोकने की जिम्मेदारी पत्नियों की है। महिला संगठन की शांति देवी आरती देवी सुमित्रा सिंह रविवार सवेरे रहीमाबाद के बंजारन खेड़ा गांव पहुंची। बताया कि उन्होंने ‘हिन्दुस्तान' अखबार में खबर पढ़ी थी कि शराब पीकर पुरुषों को गांव में प्रवेश नहीं मिलेगा। इसको पढ़ने के बाद वे पहुंची और महिलाओं द्वारा किए जा रहे इस कार्य की सराहना की।
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पुलिस भी खड़ी होगी साथ
शराब और शराबियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में पुलिस भी साथ है। इंस्पेक्टर मलिहाबाद मुकुल प्रकाश वर्मा ने कहा है कि शराब ने बहुत परिवारों को बर्बाद किया है। इसलिए अवैध कच्ची शराब पर पाबंदी जरूरी है। इन महिलाओं के हौसले को पुलिस ने भी खूब सराहा है।
पूर्व प्रधान भी साथ
पूर्व ग्राम प्रधान जिन्दौर हारून आसिफ ने बताया कि वह महिलाओं के इस कार्य की सराहना करते हैं। शराब पीकर घर आने वाले युवकों को कई बार उन्होंने समझाया भी लेकिन वह नहीं माने। पत्नियों ने हौसला दिखाया है तो इनके हौसले की सराहना करते हैं और हर तरह से इन महिलाओं की मदद की जाएगी।
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शराबी पतियों की खैर नहीं
पत्नियां बोली कि अब शराबी पतियों की शराब पीकर घर आने पर खैर नहीं है। क्योंकि दिन भर मेहनत मजदूरी करके जो कमाते हैं वह शाम को शराब में ही उड़ा देते हैं । आस-पास के गांव में ना तो शराब बनने देंगे और ना ही शराब पीकर पतियों को घर आने देंगे।
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उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के निकट रहीमाबाद के बंजारन खेड़ा गांव की महिलाओं ने शराब पीकर घर आने वाले पतियों को सबक सिखाने की पूरी तैयारी कर ली है। महिलाओं का कहना है कि ना तो गांव के आसपास शराब बनने देंगे और ना ही शराब पीकर गांव में घुसने देंगे। इसके बाद एक संगठन की महिलाएं गांव पहुंची और उन्होंने महिलाओं के हौसले को सराहा। गांव की महिलाओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि इलाके में पूरी तरह से शराब बंद होनी चाहिए। आसपास के अन्य गांव की महिलाएं भी इस अभियान में साथ आ रही हैं।
महिलाओं का कहना है कि शराब से कई परिवार तबाह हो चुके हैं। अब इस तबाही को रोकने की जिम्मेदारी पत्नियों की है। महिला संगठन की शांति देवी आरती देवी सुमित्रा सिंह रविवार सवेरे रहीमाबाद के बंजारन खेड़ा गांव पहुंची। बताया कि उन्होंने ‘हिन्दुस्तान' अखबार में खबर पढ़ी थी कि शराब पीकर पुरुषों को गांव में प्रवेश नहीं मिलेगा। इसको पढ़ने के बाद वे पहुंची और महिलाओं द्वारा किए जा रहे इस कार्य की सराहना की।
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पूर्व प्रधान भी साथ
पूर्व ग्राम प्रधान जिन्दौर हारून आसिफ ने बताया कि वह महिलाओं के इस कार्य की सराहना करते हैं। शराब पीकर घर आने वाले युवकों को कई बार उन्होंने समझाया भी लेकिन वह नहीं माने। पत्नियों ने हौसला दिखाया है तो इनके हौसले की सराहना करते हैं और हर तरह से इन महिलाओं की मदद की जाएगी।
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शराबी पतियों की खैर नहीं
पत्नियां बोली कि अब शराबी पतियों की शराब पीकर घर आने पर खैर नहीं है। क्योंकि दिन भर मेहनत मजदूरी करके जो कमाते हैं वह शाम को शराब में ही उड़ा देते हैं । आस-पास के गांव में ना तो शराब बनने देंगे और ना ही शराब पीकर पतियों को घर आने देंगे।
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Reviewed by Hindustan News 18
on
February 10, 2019
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