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नौवें मोहर्रम पर निकला अज़ादारी का ऐतिहासिक जुलूस

 नौवें मोहर्रम पर निकला अज़ादारी का ऐतिहासिक जुलूस


हजरत अब्बास के अलम का हुआ मिलाप, जंजीरी मातम और नोहाखानी में नम हुईं आंखें


गुरुवार को ग्राम फंदेड़ी सादात में नौवें मोहर्रम के अवसर पर अंजुमन सज्जादिया के तत्वावधान में नगर में अकीदत और गमगीन माहौल के बीच पारंपरिक जुलूस-ए-अज़ा निकाला गया। जुलूस में बड़ी संख्या में अज़ादारों ने भाग लेकर कर्बला के शहीदों को खिराज-ए-अकीदत पेश की।

कार्यक्रम की शुरुआत मस्जिद शुमाली में हुई, जहां मौलाना एजाज़ हैदर ने कर्बला के शहीदों की याद में तकरीर करते हुए हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों की कुर्बानियों पर प्रकाश डाला। तकरीर के बाद हजरत अब्बास आलमदार का अलम-ए-मुबारक बरामद किया गया। अज़ादार सीना और सर पीटते हुए मातम करते हुए हुसैनी चौक पहुंचे, जहां पहले से मौजूद हजरत इमाम हुसैन के अलम से हजरत अब्बास के अलम का मिलाप कराया गया।

मौलाना ने बताया कि यह मिलाप कर्बला के उस भावुक क्षण की याद दिलाता है, जब शहादत से पूर्व हजरत इमाम हुसैन और हजरत अब्बास ने एक-दूसरे से गले मिलकर विदाई ली थी। अलमों के मिलाप के बाद अज़ादारों ने मर्सिया और नौहाखानी करते हुए मातम जारी रखा तथा जुलूस मुख्य बाजार पहुंचा।

मुख्य बाजार में आयोजित मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना एजाज़ हैदर ने कर्बला के दर्दनाक घटनाक्रम का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार इमाम हुसैन, उनके परिजनों, मासूम बच्चों और 72 साथियों को तीन दिन तक भूखा-प्यासा रखकर शहीद कर दिया गया। मौलाना ने कहा कि शहादत से पूर्व इमाम हुसैन ने यजीद की सेना से पूछा था कि आखिर उनका और उनके परिवार का क्या कसूर है, लेकिन सत्ता के मद में चूर यजीदी फौज पर इस अपील का कोई असर नहीं हुआ।

मौलाना की भावुक तकरीर सुनकर उपस्थित हजारों लोगों की आंखें नम हो गईं और कई लोग रो पड़े। उन्होंने कहा कि कर्बला इंसाफ, सत्य और मानवता की रक्षा के लिए दी गई सबसे बड़ी कुर्बानी का प्रतीक है तथा इमाम हुसैन का संदेश आज भी पूरी दुनिया को अन्याय के खिलाफ खड़े होने की प्रेरणा देता है।

इस दौरान खिसाल मेहदी, सादिक हुसैन और सलमान ने नौहाखानी की। नौहाखानी के उपरांत अज़ादारों ने अंगारों का मातम किया तथा इमाम हुसैन की याद में जंजीरी मातम कर अपने आपको लहूलुहान कर दिया। पूरे मार्ग में या हुसैन  की सदाओं के बीच मातमी जुलूस आगे बढ़ता रहा।

इसके बाद दोनों भाइयों के अलमों को लेकर अज़ादार जुलूस की शक्ल में शुमाली मोहल्ले पहुंचे, जहां जुल्जनाह निकाला गया और लोगों ने उसकी जियारत की। मातम और नौहाखानी के साथ जुलूस अंततः जेनबिया इमामबाड़ा पहुंचा, जहां दुआ और मजलिस के बाद कार्यक्रम का समापन हुआ।

इस अवसर पर मनव्वर अली, सईद अख्तर, मोमिन अख्तर, कामिल, एहसान मेहदी, अबरार, मोहम्मद फाजिल, मोहम्मद रज़ा, मौलाना मोहम्मद मेहदी, मोनिस अब्बास, शाबान अली, यूनुस अली, मौलाना तालिब, मौलाना अबरार, मौलाना असद, चांद अली, जमाल, महताब सहित बड़ी संख्या में अंजुमन पदाधिकारी, अज़ादार मौजूद रहे।

नौवें मोहर्रम पर निकला अज़ादारी का ऐतिहासिक जुलूस Reviewed by Hindustan News 18 on June 25, 2026 Rating: 5

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