दवा विक्रेताओं ने तहसील में प्रदर्शन कर प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
दवा विक्रेताओं ने तहसील में प्रदर्शन कर प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
बुधवार को अवैध ऑनलाइन दवा बिक्री और दवा कंपनियों की कथित मनमानी नीतियों के विरोध में क्षेत्र के दवा विक्रेताओं का गुस्सा खुलकर सामने आया। ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ कैमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स के आह्वान पर कस्बे के सभी मेडिकल स्टोर बंद रहे, जिससे पूरे क्षेत्र में दवा आपूर्ति प्रभावित रही। दवा व्यापारियों ने तहसील परिसर में प्रदर्शन कर केंद्र सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई और तहसीलदार मूसराम थारू को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम ज्ञापन सौंपा।
केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन के सचिव गंगाधर रुहेला ने कहा कि ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 में ऑनलाइन दवा बिक्री का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है, इसके बावजूद बड़ी कॉर्पोरेट और क्विक कॉमर्स कंपनियां फर्जी ई-प्रिस्क्रिप्शन के जरिए घर-घर दवाइयों की डिलीवरी कर रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना डॉक्टर की उचित जांच और सत्यापन के दवाओं की सप्लाई जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है।
दवा विक्रेताओं का कहना है कि ऑनलाइन कंपनियां भारी छूट देकर बाजार पर कब्जा करने की कोशिश कर रही हैं। एसोसिएशन के अनुसार बहुराष्ट्रीय कंपनियां ‘प्रिडेटरी प्राइसिंग’ के जरिए पारंपरिक मेडिकल स्टोरों को खत्म करने की रणनीति अपना रही हैं, जिससे छोटे व्यापारियों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है।
प्रदर्शन के दौरान व्यापारियों ने आरोप लगाया कि कंपनियां पुरानी अधिसूचनाओं GSR 817E और GSR 220E का गलत फायदा उठा रही हैं। उनका कहना है कि ये अधिसूचनाएं विशेष परिस्थितियों के लिए जारी की गई थीं, लेकिन अब इन्हें स्थायी व्यापारिक मॉडल के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। दवा विक्रेताओं ने सरकार से इन अधिसूचनाओं को तत्काल वापस लेने की मांग की।
ज्ञापन के माध्यम से दवा व्यापारियों ने ऑनलाइन दवा बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने, बिना सत्यापित डॉक्टर के पर्चे के दवाओं की होम डिलीवरी को गैर-कानूनी घोषित करने, पुरानी अधिसूचनाओं को वापस लेने तथा अत्यधिक छूट नीति पर रोक लगाने की मांग उठाई।
पदाधिकारियों ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान जब पूरा देश घरों में बंद था, तब छोटे केमिस्टों ने अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों तक दवाइयां पहुंचाईं, लेकिन अब वही व्यापारी अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ने को मजबूर हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।
इस दौरान गंगाधर रूहेला, टिंकू सैनी, धर्मेंद्र सैनी, संजय किशोर, अफजाल सैफी, आदित्य शर्मा, मयंक मुदगल, फैजान मलिक, सौरभ सैनी, गुलाब सिंह और यशपाल सिंह समेत बड़ी संख्या में दवा विक्रेता मौजूद रहे।
Reviewed by Hindustan News 18
on
May 20, 2026
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