प्रोजेक्ट संकल्प के तहत नोरैक्स फ्लेवर्स ने 500 से अधिक किसानों को वितरित की निःशुल्क मैंथा जड़ें
प्रोजेक्ट संकल्प के तहत नोरैक्स फ्लेवर्स ने 500 से अधिक किसानों को वितरित की निःशुल्क मैंथा जड़े
शुक्रवार को सतत कृषि और किसान क्षमता निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाते हुए नोरैक्स फ्लेवर्स प्राइवेट लिमिटेड ने प्रोजेक्ट संकल्प के अंतर्गत हसनपुर और मंडी धनौरा में सतत एवं पुनर्योजी कृषि पद्धतियों पर किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए। कार्यक्रमों में लगभग 100 किसानों और ग्रामीणों ने भाग लेकर आधुनिक खेती की तकनीकों की जानकारी प्राप्त की।
प्रशिक्षण का नेतृत्व सीएसआईआर–सीमैप के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. राकेश कुमार ने किया। उन्होंने उन्नत कृषि पद्धतियों, फसल प्रबंधन तथा सतत मैंथा खेती पर व्यावहारिक मार्गदर्शन प्रदान किया। प्रशिक्षण के दौरान जलवायु-अनुकूल खेती, संसाधनों के संतुलित उपयोग तथा जिम्मेदार कृषि इनपुट अपनाने पर विशेष जोर दिया गया।
कार्यक्रम में कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट शशांक अग्रवाल भी मौजूद रहे। वहीं सस्टेनेबिलिटी प्रमुख ललित कुमार तथा सस्टेनेबिलिटी प्रबंधक अनुराग नाथ ने सत्रों में सक्रिय भागीदारी करते हुए सतत सोर्सिंग पद्धतियों, गुणवत्ता-आधारित खेती, दीर्घकालिक किसान साझेदारी तथा उत्पादकता और किसान आय बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक एवं पर्यावरण-अनुकूल खेती पर अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम की मेज़बानी दीपक शर्मा ने की, जबकि मैदानी स्तर पर समन्वय अरुण कुमार द्वारा किया गया। उनके साथ फील्ड अधिकारियों तेजपाल सिंह, अनिकेत कुमार, विपुल कुमार और मनोज शर्मा ने किसान सहभागिता और संवाद को प्रभावी ढंग से संचालित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।बता दे कि
प्रोजेक्ट संकल्प के तहत नोरैक्स फ्लेवर्स प्राइवेट लिमिटेड पिछले कई वर्षों से इन क्षेत्रों में किसान क्षमता-निर्माण कार्यक्रमों का निरंतर संचालन कर रही है। हालिया प्रयासों के अंतर्गत बेहतर मैंथा खेती को बढ़ावा देने, किसानों की सहनशीलता बढ़ाने तथा सतत एवं जलवायु-अनुकूल कृषि की दिशा में बदलाव को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से कंपनी ने हसनपुर और मंडी धनौरा में 500 से अधिक किसानों को निःशुल्क मैंथा की जड़ें भी वितरित की हैं।
यह पहल किसानों के ज्ञान को सशक्त बनाने और जमीनी स्तर पर सतत कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने की दिशा में कंपनी के निरंतर प्रयासों को दर्शाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने के साथ उनकी आय वृद्धि और पर्यावरण संरक्षण दोनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
Reviewed by Hindustan News 18
on
February 27, 2026
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