धनौरा तहसील में यूजीसी एक्ट 2026 लागू करने की उठी मांग
धनौरा तहसील में यूजीसी एक्ट 2026 लागू करने की उठी मांग
उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव व छात्र आत्महत्याओं पर रोक लगाने के लिए राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन
भारतीय उच्च शिक्षण संस्थानों में बढ़ते जातिगत भेदभाव, मानसिक उत्पीड़न और छात्र आत्महत्याओं की घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए गुरुवार को अपनी जनता पार्टी व समता सैनिक दल के कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन तहसीलदार मूसा राम थारु को सौंपा। ज्ञापन में यूजीसी एक्ट 2026 को तत्काल प्रभाव से लागू करने की मांग की गई है।ताकि शिक्षा संस्थानों में समानता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।
ज्ञापन में कहा गया कि आजादी के दशकों बाद भी देश के प्रतिष्ठित संस्थानों जैसे आईआईटी, एनआईटी और केंद्रीय विश्वविद्यालयों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्र-छात्राएं जातिगत द्वेष और मानसिक प्रताड़ना का सामना कर रहे हैं ।प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि संस्थानों में व्याप्त भेदभावपूर्ण माहौल के कारण कई प्रतिभाशाली छात्रों को असमय अपनी जान गंवानी पड़ी है।
कार्यकर्ताओं ने हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के शोध छात्र रोहित वेमुला, मुंबई के नायर अस्पताल से जुड़ी डॉ. पायल तड़वी और आईआईटी बॉम्बे के छात्र दर्शन सोलंकी की मृत्यु का उल्लेख करते हुए कहा कि इन घटनाओं को केवल आत्महत्या नहीं माना जा सकता, बल्कि यह व्यवस्थागत भेदभाव और संस्थागत असंवेदनशीलता का परिणाम हैं। उन्होंने कहा कि जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक ऐसी घटनाओं पर रोक लगाना कठिन है।
ज्ञापन में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो और अन्य हालिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए बताया गया कि वर्ष 2023 में देशभर में छात्र आत्महत्याओं की संख्या 13,892 तक पहुंच गई, जो अत्यंत चिंताजनक है। इसके अलावा जनवरी और फरवरी 2026 में आईआईटी कानपुर और आईआईटी बॉम्बे में भी दुखद घटनाएं सामने आईं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि समस्या अभी भी गंभीर बनी हुई है।
प्रतिनिधिमंडल ने यह भी कहा कि प्रशासनिक स्तर पर भेदभाव और मानसिक दबाव की स्थिति चिंताजनक है। वर्ष 2025 में हरियाणा के एक आईपीएस अधिकारी द्वारा उठाए गए आत्मघाती कदम का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सामाजिक और संस्थागत दबाव केवल छात्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापक स्तर पर मौजूद है।
ज्ञापन में मांग की गई कि प्रस्तावित यूजीसी एक्ट 2026 को शीघ्र लागू कर उच्च शिक्षण संस्थानों में एंटी-डिस्क्रिमिनेशन सेल, मानसिक स्वास्थ्य सहायता केंद्र और स्वतंत्र निगरानी तंत्र की स्थापना अनिवार्य की जाए। प्रतिनिधियों ने कहा कि यह विधेयक संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 17 और 21 के तहत प्रदत्त समानता, भेदभाव निषेध, अस्पृश्यता उन्मूलन और जीवन व गरिमा के अधिकार को प्रभावी रूप से लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। कार्यकर्ताओं ने सरकार से मांग की कि सभी केंद्रीय एवं राज्य स्तरीय शिक्षण संस्थानों में पारदर्शी शिकायत निवारण तंत्र लागू किया जाए और दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
इस अवसर पर राजपाल सिंह सैनी, विक्रम सैनी प्रधान, दयाराम गौतम, दिनेश एडवोकेट, मुनिदेव, रंजीत बौद्ध, बाबूराम बौद्ध, लता देवी, अशोक उर्फ लुक्का सैनी, ब्रह्म सिंह, तारा चंद, तेजराम सिंह, हरिओम सिंह, खुशविंद्र और योगेंद्र कुमार सिंह सहित समता सैनिक दल व अपनी जनता पार्टी के अनेक पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे।
Reviewed by Hindustan News 18
on
February 26, 2026
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