अमरोहा की द्रोणाचार्य बनी दीपा सिरोही ने योग की घर घर अलख जगाई
अमरोहा की द्रोणाचार्य बनी दीपा सिरोही ने योग की घर घर अलख जगाई।
एमपी सिहं 【वरिष्ठ पत्रकार 】
अमरोहा।20 जून।अपने सेहत के बारेमें सोचे हमें अपने शरीर के लिए कुछ वक्त निकलना जरुरी हैं, और अपने मन को और शरीर को तंदरुस्त बनाने के लिए एक आसान उपाय हैं और वो हैं योग करना...अमरोहा के मल्हूपुरा, कोराल, मलेशिया पेली तगा तथा पालनपुर आदि गांवो में धीरे धीरे कैंसर अपने पांव पसारता जा रहा है।कैंसर की वजह से अपने पिता को खो देने के बाद मंडी धनौरा के गांव मल्हूपुरा की योग में पारंगत, स्पोर्ट्स पर्सनैलिटी दीपा सिरोही ने घर घर योग की अलख जगाकर कैंसर को मात देने की ठान ली है।
दीपा सिरोही ने योग को बना दिया मानसिक अवसाद की दवा।सरोकार, स्वस्थ्य समाज।लोगों की भलाई को समर्पित कर दिया जीवन।भोजन की तरह योग भी जीवन की अनिवार्यता का संदेश दिया।
उन्होंने बताया कि रिसर्चरों ने पाया है कि योग और ध्यान पर आधारित माइंडफुलनेस नाम की तकनीक का अभ्यास लोगों में तनाव का स्तर कम कर रहा है. यह दिमाग की शक्ति बढ़ाने, याददाश्त और इम्युनिटी को भी बेहतर बना रहा है,जिससे कैंसर जैसे असाध्य रोगों पर विजय प्राप्त की जा सकती है।
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की तैयारियों के क्रम में उत्साही योग साधकों ने दीपा सिरोही के नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की पूर्व संध्या पर अमरोहा के मंडी धनौरा गांधी मैदान पर आज योग का रिहर्सल किया।आगामी 22,23 जून को योग पखवाड़े के अंतर्गत अमरोहा पुलिस लाईन मे पुलिसकर्मियों को योग के बारे में जागरूक किया जाएगा।
राष्ट्रीय स्तर पर खेलों में भाग ले चुकी हैमर थ्रो की राष्ट्रीय खिलाड़ी दीपा सिरोही योग के जरिए लोगों को मानसिक अवसाद से उबारने का काम कर रही हैं। कहती हैं, स्वस्थ्य जीवन के लिए तो योग और प्राणायाम उतना ही जरूरी है, जितना जीवित रहने के लिए भोजन। पिता की बीमारी के बाद जब खुद अवसाद में चली गईं तो इसी योग के सहारे उन्होंने नया जीवन शुरू किया और खेले कोटे से मिलने वाली सरकारी नौकरी को तवज्जो ना देकर लोगों की भलाई के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।
अमरोहा के मंडी धनौरा तहसील क्षेत्र के गांव मल्हूपुरा निवासी किसान चौधरी यशपालसिंह की 27 वर्षीय बेटी दीपा सिरोही अवसाद से घिरे लोगों को जीने की नई राह दिखा रही हैं। वैसे वह वर्ष 2011 में लखनऊ में आयोजित जूनियर नेशनल चैंपियनशिप तथा 2014 में चेन्नई में आयोजित नेशनल चैंपियनशिप में हैमर थ्रो में भी सफलता पूर्वक भाग ले चुकी हैं। दीपा बचपन से ही पिता के करीब रही हैं और पिता की भी वह दुलारी रही हैं। ऐसे में पिता को कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से असामायिक मृत्यु के बाद दीपा अवसाद में चली गईं। पिता की सेवा मे रातदिन एक कर देने की वजह से उन्होंने स्पोर्ट्स कोटे से मिलने वाली नौकरी भी ज्वाइन नहीं की। दीपा के भाई उमेंद्र सिरोही भारतीय सैन्य अकादमी समेत देश-विदेश में बतौर हैल्थ इंस्ट्रक्टर सेवाएं प्रदान कर चुके हैं। प्रशिक्षु सैन्य अधिकारियों के प्रशिक्षण में अवसर प्राप्त सैन्य कर्मी का घर पर भी कम ही आना जाना रहा है। लेकिन पिता की बीमारी से असामायिक मृत्यु से बहन के अवसाद की सूचना पर वह घर पहुंचे और करीब एक माह तक दीपा को योग और प्राणायाम के जरिए अवसाद से उबारा। अवसाद से उबरने के बाद दीपा ने अपने ही जैसे युवाओं को याेग के जरिए अवसाद से उबारने का संकल्प लिया। अब वह मंडी धनौरा के एमएस सीनियर सेकेंडरी स्कूल में योग की क्लासेज के बाद वृहत स्तर पर और बड़ी संख्या में लोगाें को अवसाद से उबारकर जीने की राह सिखा हैं। इस काम में दीपा के पति मुनेंद्र जो कि हरियाणा में शिक्षक हैं उनका भी खूब साथ मिला। उन्होंने भी पिता की देखभाल और लोगों को अवसाद से उबारने के संकल्प में उनका साथ दिया। दीपा कई बार जनपद स्तर पर आयोजित कार्यक्रमों में पुलिस कर्मियों को योग व प्राणायाम का प्रशिक्षण दे चुकी हैं, ताकि पुलिसकर्मी तनाव भरे माहाैल में अपने कर्त्तव्यों ठीक ढंग से निर्वहन कर सकें। गंगाा धाम तिगरी में कार्तिक पूर्णिमा पर लगने वाले पश्चिम उत्तर भारत के ऐतिहासिक गंगा मेले में भी दीपा ने श्रद्धालुओं को चार दिन तक योगाभ्यास कराया था।
अवसाद से बचने को नियमित योग व प्राणायाम मंत्र.. दीपा सिरोही ने बताया कि अवसाद से उबरने और इससे बचने को नियमित रूप से योग व प्राणायाम करने का मंत्र देती हैं। इसका बड़ी संख्या में लोग लाभ भी उठा चुके हैं। मंडी धनौरा के शिव कुमार अग्रवाल का कई साल से अवसाद का इलाज चल रहा था, लेकिन दीपा की योग क्लासेज में आने के बाद उनका अवसाद तो दूर हुआ ही, साथ ही अब बिना दवा के सामान्य जीवन जी रहे हैं। इसी तरह से तेरह साल की मंडी धनौरा की नैंसी भी अवसाद से बाहर निकल चुकी हैं। वह काफी दुबली पतली हैं बच्चे उन्हें चिढ़ाते थे जिसकी वजह से ये भी अवसाद में चली गईं थी। अनुष्का चाहल पढ़ाई में कमजोर होने की वजह से अवसाद में चली गईं थी, लेकिन नियमित रूप से योग और प्राणायाम करने से सामान्य जीवन जी रही हैं। इसी तरह से पढ़ाई में कमजोर छात्रा शगुन, पीठ दर्द की बीमारी की वजह से तेजपाल सिंह व सुरेश सिंह तथा बरन सिंह भी बीमारी की वजह से अवसाद में चले गए थे। लेकिन अब दीपा की योग क्लासेज में आने से उनके स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हो रहा है
एमपी सिहं 【वरिष्ठ पत्रकार 】
अमरोहा।20 जून।अपने सेहत के बारेमें सोचे हमें अपने शरीर के लिए कुछ वक्त निकलना जरुरी हैं, और अपने मन को और शरीर को तंदरुस्त बनाने के लिए एक आसान उपाय हैं और वो हैं योग करना...अमरोहा के मल्हूपुरा, कोराल, मलेशिया पेली तगा तथा पालनपुर आदि गांवो में धीरे धीरे कैंसर अपने पांव पसारता जा रहा है।कैंसर की वजह से अपने पिता को खो देने के बाद मंडी धनौरा के गांव मल्हूपुरा की योग में पारंगत, स्पोर्ट्स पर्सनैलिटी दीपा सिरोही ने घर घर योग की अलख जगाकर कैंसर को मात देने की ठान ली है।
दीपा सिरोही ने योग को बना दिया मानसिक अवसाद की दवा।सरोकार, स्वस्थ्य समाज।लोगों की भलाई को समर्पित कर दिया जीवन।भोजन की तरह योग भी जीवन की अनिवार्यता का संदेश दिया।
उन्होंने बताया कि रिसर्चरों ने पाया है कि योग और ध्यान पर आधारित माइंडफुलनेस नाम की तकनीक का अभ्यास लोगों में तनाव का स्तर कम कर रहा है. यह दिमाग की शक्ति बढ़ाने, याददाश्त और इम्युनिटी को भी बेहतर बना रहा है,जिससे कैंसर जैसे असाध्य रोगों पर विजय प्राप्त की जा सकती है।
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की तैयारियों के क्रम में उत्साही योग साधकों ने दीपा सिरोही के नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की पूर्व संध्या पर अमरोहा के मंडी धनौरा गांधी मैदान पर आज योग का रिहर्सल किया।आगामी 22,23 जून को योग पखवाड़े के अंतर्गत अमरोहा पुलिस लाईन मे पुलिसकर्मियों को योग के बारे में जागरूक किया जाएगा।
राष्ट्रीय स्तर पर खेलों में भाग ले चुकी हैमर थ्रो की राष्ट्रीय खिलाड़ी दीपा सिरोही योग के जरिए लोगों को मानसिक अवसाद से उबारने का काम कर रही हैं। कहती हैं, स्वस्थ्य जीवन के लिए तो योग और प्राणायाम उतना ही जरूरी है, जितना जीवित रहने के लिए भोजन। पिता की बीमारी के बाद जब खुद अवसाद में चली गईं तो इसी योग के सहारे उन्होंने नया जीवन शुरू किया और खेले कोटे से मिलने वाली सरकारी नौकरी को तवज्जो ना देकर लोगों की भलाई के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।
अमरोहा के मंडी धनौरा तहसील क्षेत्र के गांव मल्हूपुरा निवासी किसान चौधरी यशपालसिंह की 27 वर्षीय बेटी दीपा सिरोही अवसाद से घिरे लोगों को जीने की नई राह दिखा रही हैं। वैसे वह वर्ष 2011 में लखनऊ में आयोजित जूनियर नेशनल चैंपियनशिप तथा 2014 में चेन्नई में आयोजित नेशनल चैंपियनशिप में हैमर थ्रो में भी सफलता पूर्वक भाग ले चुकी हैं। दीपा बचपन से ही पिता के करीब रही हैं और पिता की भी वह दुलारी रही हैं। ऐसे में पिता को कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से असामायिक मृत्यु के बाद दीपा अवसाद में चली गईं। पिता की सेवा मे रातदिन एक कर देने की वजह से उन्होंने स्पोर्ट्स कोटे से मिलने वाली नौकरी भी ज्वाइन नहीं की। दीपा के भाई उमेंद्र सिरोही भारतीय सैन्य अकादमी समेत देश-विदेश में बतौर हैल्थ इंस्ट्रक्टर सेवाएं प्रदान कर चुके हैं। प्रशिक्षु सैन्य अधिकारियों के प्रशिक्षण में अवसर प्राप्त सैन्य कर्मी का घर पर भी कम ही आना जाना रहा है। लेकिन पिता की बीमारी से असामायिक मृत्यु से बहन के अवसाद की सूचना पर वह घर पहुंचे और करीब एक माह तक दीपा को योग और प्राणायाम के जरिए अवसाद से उबारा। अवसाद से उबरने के बाद दीपा ने अपने ही जैसे युवाओं को याेग के जरिए अवसाद से उबारने का संकल्प लिया। अब वह मंडी धनौरा के एमएस सीनियर सेकेंडरी स्कूल में योग की क्लासेज के बाद वृहत स्तर पर और बड़ी संख्या में लोगाें को अवसाद से उबारकर जीने की राह सिखा हैं। इस काम में दीपा के पति मुनेंद्र जो कि हरियाणा में शिक्षक हैं उनका भी खूब साथ मिला। उन्होंने भी पिता की देखभाल और लोगों को अवसाद से उबारने के संकल्प में उनका साथ दिया। दीपा कई बार जनपद स्तर पर आयोजित कार्यक्रमों में पुलिस कर्मियों को योग व प्राणायाम का प्रशिक्षण दे चुकी हैं, ताकि पुलिसकर्मी तनाव भरे माहाैल में अपने कर्त्तव्यों ठीक ढंग से निर्वहन कर सकें। गंगाा धाम तिगरी में कार्तिक पूर्णिमा पर लगने वाले पश्चिम उत्तर भारत के ऐतिहासिक गंगा मेले में भी दीपा ने श्रद्धालुओं को चार दिन तक योगाभ्यास कराया था।
अवसाद से बचने को नियमित योग व प्राणायाम मंत्र.. दीपा सिरोही ने बताया कि अवसाद से उबरने और इससे बचने को नियमित रूप से योग व प्राणायाम करने का मंत्र देती हैं। इसका बड़ी संख्या में लोग लाभ भी उठा चुके हैं। मंडी धनौरा के शिव कुमार अग्रवाल का कई साल से अवसाद का इलाज चल रहा था, लेकिन दीपा की योग क्लासेज में आने के बाद उनका अवसाद तो दूर हुआ ही, साथ ही अब बिना दवा के सामान्य जीवन जी रहे हैं। इसी तरह से तेरह साल की मंडी धनौरा की नैंसी भी अवसाद से बाहर निकल चुकी हैं। वह काफी दुबली पतली हैं बच्चे उन्हें चिढ़ाते थे जिसकी वजह से ये भी अवसाद में चली गईं थी। अनुष्का चाहल पढ़ाई में कमजोर होने की वजह से अवसाद में चली गईं थी, लेकिन नियमित रूप से योग और प्राणायाम करने से सामान्य जीवन जी रही हैं। इसी तरह से पढ़ाई में कमजोर छात्रा शगुन, पीठ दर्द की बीमारी की वजह से तेजपाल सिंह व सुरेश सिंह तथा बरन सिंह भी बीमारी की वजह से अवसाद में चले गए थे। लेकिन अब दीपा की योग क्लासेज में आने से उनके स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हो रहा है
अमरोहा की द्रोणाचार्य बनी दीपा सिरोही ने योग की घर घर अलख जगाई
Reviewed by Hindustan News 18
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June 20, 2019
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